Saturday, September 17, 2016
Tuesday, September 13, 2016
मैं तो हो गई हूँ लोंगो से अनजान
मिटती जा रही है मेरी पहचान
मैं तो हो गई हूँ लोंगो से अनजान
बस आपके कमरे के तस्वीर में रह गई है मेरी निशान
अब तो बस गिनती में बच गई हूँ मैं
पता नहीं फिर कब आपके चौखट पर बनके आउंगी मेहमान...
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