Saturday, September 17, 2016

प्रकृति की इस रंगीन दुनिया की साज हो तुम

सिर्फ तस्वीरों में कैद रहने की नहीं मोहताज हो तुम
प्रकृति की इस रंगीन दुनिया की साज हो तुम
आजादी का मतलब कोई तुमसे सीखें
आजादी की खुली किताब हो तुम

Tuesday, September 13, 2016

प्रकृति की श्रृंगार हूँ मैं गिलहरी

प्रकृति की श्रृंगार हूँ मैं
पेड़ की हर डाली की दिलदार हूँ मैं
पेड़ो की डाली पर उछलती हूँ, कूदती हूँ, गिरती सौ बार हु मैं 
पर हारती नहीं हिम्मत, फिर कोशिश करती एक बार हूँ मैं
प्रकृति की श्रृंगार हूँ मैं...

मैं तो हो गई हूँ लोंगो से अनजान

मिटती जा रही है मेरी पहचान
मैं तो हो गई हूँ लोंगो से अनजान
बस आपके कमरे के तस्वीर में रह गई है मेरी निशान
अब तो बस गिनती में बच गई हूँ मैं
पता नहीं फिर कब आपके चौखट पर बनके आउंगी मेहमान...

Magical mynah

A pair of mynah perhaps searching for suitable place to build their nest...