एक नजर इधर भी
मिटती जा रही है मेरी पहचान मैं तो हो गई हूँ लोंगो से अनजान बस आपके कमरे के तस्वीर में रह गई है मेरी निशान अब तो बस गिनती में बच गई हूँ मैं पता नहीं फिर कब आपके चौखट पर बनके आउंगी मेहमान...
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