Tuesday, July 18, 2017

The Karla Caves Lonawala Pune

The Karla Caves or Karle Kaves or Karla Cells are a complex of accient Indian Buddhist rock-cut cave shrines located in Karli near Lonavala Maharashtra .

ये फूल तुम्हारे लिये

कितना खुबसुरत हो तुम - प्रकृति

जितनी खुबसुरत हो तुम ,ऐ प्रकृति...उतना ही अदभुत है तुम्हारा नजारा...तुम्हारे तारीफ में मेरे शब्द कम पड गए...क्योंकि बहुत बड़ा है दिल तुम्हारा...

Monday, May 29, 2017

India Gate Delhi | संस्कृति और विरासत



नई दिल्‍ली के मध्‍य चौराहे में 42 मीटर ऊंचा इंडिया गेट है जो मेहराबदार "आर्क-द ट्रायम्‍फ" के रूप में है। इसके फ्रैंच काउंटरपार्ट के अनुरूप यहां 70,000 भारतीय सैनिकों का स्‍मारक है। जिन्‍होंने विश्‍व युद्ध-। के दौरान ब्रिटिश आर्मी के लिए अपनी जान गंवाई थी। इस स्‍मारक में अफगान युद्ध-1919 के दौरान पश्चिमोत्‍तर सीमांत (अब उत्‍तर-पश्चिम पाकिस्‍तान) में मारे गए 13516 से अधिक ब्रिटिश और भारतीय सैनिकों के नाम अंकित है। इंडिया गेट की आधारशिला 1921 में माननीय डयूक ऑफ कनॉट ने रखी थी और इसे एडविन ल्‍यूटन ने डिजाइन किया था। इस स्‍मारक को 10 साल बाद तत्‍कालीन वायसराय लार्ड इर्विन ने राष्‍ट्र को समर्पित किया था। अन्‍य स्‍मारक अमर ज्‍योति भारत स्‍वतंत्रता के काफी बाद स्‍थापित की गई थी। मेहराब के नीचे यह अमर-ज्‍योति दिन-रात जलती रहती है, जो दिसंबर 1971 के भारत पाक युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की याद दिलाती है।

इसका सम्‍पूर्ण मेहराब भरतपुर के लाल पत्‍थरों के लो-बेस पर स्‍थापित किया गया है और चरणबद्ध रूप से विशाल स्‍मारक बनाया गया। इसके कोने के मेहराबों पर ब्रितानिया-सूर्य अंकित है जबकि महराब के दोनों ओर INDIA अंकित है इसके नीचे MCMX। (1914 बाई तरफ) और MCMXIX(1919 दाई तरफ) अंकित है। सबसे ऊपर में गहरा गुम्‍बदनुमा कटोरा जयंतियों पर तेल जलाकर प्रकाशित करने के लिए बनाया गया था किन्‍तु इसका उपयोग ही यदा-कदा किया जाता है।

रात्रि में इंडिया गेट को फ्लडलाइट से जगमगाया जाता है जबकि समीपवर्ती फव्वारों को रोशनियों से जगमगाते हैं। यह राजपथ के सामने के छोर पर स्थित है और इसके आस-पास के क्षेत्र को सामान्‍यत: इंडिया-गेट कहा जाता है।

इसके आस-पास हरा–भरा ब्रहत प्रागंण है जो पिकनिक-स्‍थल के लिए भी मशहूर है। ग्रीष्‍मकालीन शामों को इस प्रांगण और प्रकाशमय क्षेत्र में लोगों के हुजूम देखने को मिलेंगे।


Tuesday, March 14, 2017

सड़क जो मेरे गाँव तक जाती है...

मत समझो कम हमें की हम गाँव  से आये है 

तेरे शहर के बाज़ार मेरे गाँव ने ही सजाये है

Sunday, March 12, 2017

Happy Holi

होलिका दहन एवं होली की ढेर सारी शुभकामनाएं एवं बधाईया

Monday, March 6, 2017

एक प्यासा कौआ

अमीर के घर का कौआ
सबको मोर लगता है,

गरीब जब भूखा होता है
तो सबको चोर लगता है ।

Thursday, March 2, 2017

Cutting Masala Dhosa

                                                  आइये साहब सुबह का नास्ता कीजिए

Wednesday, March 1, 2017

मेरे देश की धरती, सोना उगले उगले हीरे मोती


बैलों के गले में जब घुंघरू जीवन का राग सुनाते हैं
ग़म कोस दूर हो जाता है खुशियों के कंवल मुस्काते हैं
सुनके रहट की आवाज़ें यूँ लगे कहीं शहनाई बजे
आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे,
मेरे देश ...

Monday, February 27, 2017

मेरा गाँव मेरा देश

मत समझो कम हमें की हम गाँव  से आये है 
तेरे शहर के बाज़ार मेरे गाँव ने ही सजाये है

Tuesday, February 21, 2017

जल ही जीवन है

आइये हम सब मिल कर जल को बचाये...ना जल बर्बाद करे न जल बर्बाद करने दे... 'जल है तो कल है'

Monday, February 20, 2017

एक और नई सुबह (Good Morning)

फूलों को छेड़ती मधुमखी

सुबह -सुबह बागों में घूमना रंगविरंगे खूबसूरत फूलो और उस पर मधुमखी का झूलना अच्छा लगता ।

बहेड़ा(Terminalia) उपयोगी वृक्ष

बहेड़ा या बिभीतकी (Terminalia bellirica) के पेड़ बहुत ऊंचे, फैले हुए और लंबे होते हैं। इसके पेड़ 18 से 30 मीटर तक ऊंचे होते हैं जिसकी छाल लगभग 2 सेंटीमीटर मोटी होती है। इसके पेड़ पहाडों और ऊंची भूमि में अधिक मात्रा में पाये जाते हैं। इसकी छाया स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है। इसके पत्ते बरगद के पत्तों के समान होते हैं तथा पेड़ लगभग सभी प्रदेशों में पाये जाते हैं। इसके पत्ते लगभग 10 सेंटीमीटर से लेकर 20 सेंटीमीटर तक लम्बे तथा और 6 सेंटीमीटर से लेकर 9 सेंटीमीटर तक चौडे़ होते हैं। इसका फल अण्डे के आकार का गोल और लम्बाई में 3 सेमी तक होता है, जिसे बहेड़ा के नाम से जाना जाता है। इसके अंदर एक मींगी निकलती है, जो मीठी होती है। औषधि के रूप में अधिकतर इसके फल के छिलके का उपयोग किया जाता है।

Monday, January 9, 2017

What happened when Monkey See Mirror . Bhutta

पिछले दिनों अपने मीडिया हाउस के काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ था तभी अचानक एक बंदर पर नजर पड़ा फिर क्या खुद को रोक नहीं पाया कैमरा निकाला और क्लिक कर लिया । 
कितने सिद्दत से बैठा बंदर और आराम से खाता भुट्टा।

Sunday, January 8, 2017

ढलती जाये शाम - Biharsharif

यह तस्वीर बिहारशरीफ की है । छठी घाट पर सभी माताये सूर्य को पहला अर्ध्य देने का इंतजार कर रही है तभी सूर्य भागवान भास्कर अपनी रौशनी भिखरते नजर आते है । सुंदर मनोरम दृश्य ।