Tuesday, September 13, 2016

प्रकृति की श्रृंगार हूँ मैं गिलहरी

प्रकृति की श्रृंगार हूँ मैं
पेड़ की हर डाली की दिलदार हूँ मैं
पेड़ो की डाली पर उछलती हूँ, कूदती हूँ, गिरती सौ बार हु मैं 
पर हारती नहीं हिम्मत, फिर कोशिश करती एक बार हूँ मैं
प्रकृति की श्रृंगार हूँ मैं...

1 comment:

  1. हमें जिन्दगी में कोशिश करना नहीं छोड़ना चाहिये...
    पता नहीं सफलता आपकी अगली कोशिश में छुपी हों...

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